हमारे आस-पास

उमेश चौहान

संदिग्ध का चेहराहमारे आस-पास के हीकिसी आदमी से मिलता-जुलता था। जो बम फटा थाउस पर हमारे आस-पास के हीकिसी मुल्क की पहचान छपी थी। हादसे में जो लोग मरे थेवे हमारे आस-पास के हीकिन्हीं मोहल्लों के रहने वाले थे। हम समझ नहीं पा रहे थे किहमारे आस-पास ऐसा क्यों हो रहा है,धीरे-धीरे अपने पड़ोसियों पर … Read more

सहयात्री

उमेश चौहान

हम भी सहयात्री हैंउसी जलयान केजिस पर सवार होकर करने चले हो तुमविश्व की परिक्रमा,गहरे समुद्र के बीचडूबने का कोई अवसर आने पर क्या भिन्न-भिन्न होंगे मित्र!हमारी-तुम्हारी मृत्यु के अनुभव?क्या हमारे अनुभवों की भिन्नतासिर्फ इसलिए होगी किहम एक गरीब देश के हैंखाते-पीते और बरबाद नहीं करते तुम्हारे जितना भोजनऔर तुम एक सुविधा-संपन्न अमीर देश से … Read more

सूर्यघड़ी

उमेश चौहान

बड़े जोश में आते हैंतरह-तरह के लोगदेश के कोने-कोने सेभाँति-भाँति के बैनर व तख्तियाँ थामे,विस्थापित कश्मीरी पंडितअधिकारों से वंचित आदिवासीघर से उजड़े नर्मदा घाटी के निवासीभूखे-प्यासे मजदूर-किसानजंतर-मंतर के मोड़ परअपनी-अपनी माँगें पूरी कराने के लिए धरना-प्रदर्शन करने। लेकिन यहाँ से गूँजते नारों की आवाजनहीं पहुँचती प्रायःपास में ही स्थित संसद-भवन के गलियारों तकया फिर शायद … Read more

शीला भयाक्रांत है

उमेश चौहान

शीला झारखंड से दिल्ली आई हैवहाँ पलामू के एक वन्य गाँव मेंउसका छोटा-सा घर हैघर में माँ-बाप हैंभाई है, बहने हैंघर की दीवारों पर शीला के द्वारा माँ के साथ मिलकर बनाई गईजनजातीय कलाकृतियाँ हैंबाहर वन में उन्मुक्त विचरण करताउसका बचपन हैऔर भी बहुत कुछ हैउसको प्यारा लगने वाला वहाँलेकिन सरकारी व्यवस्थाओं में जकड़ा जंगलरोटी … Read more

शिकारी

उमेश चौहान

अभी-अभी मिली हैएक अबोध बच्ची की क्षत-विक्षत लाशमोहल्ले के नुक्कड़ पर रखे कचरे के डंपर के पासअभी-अभी फेंकी गई है एक युवती की लहू-लुहान देहकिसी लंबी-ऊँची दौड़ती कार से सड़क के किनारेअभी-अभी तेजाब फेंककर जला दिया गया हैभरे बाजार के बीच एक सुंदर लड़की के चेहरे कोअभी-अभी अस्पताल ले जाया गया है एक नवागत बहू … Read more

वह वक्त अब आना नहीं

उमेश चौहान

“नाराज हो?”“ऐसा लगा क्या?”“कुछ कष्ट है?”“किसको नहीं?”“मुझसे कहो!”“कैसे कहूँ?”“कुछ तो कहो!”“क्या फायदा?”“शायद करूँ कुछ!”“अब तक किया क्या?”“हर्ज़ क्या है?”“स्वयं बूझो!” “तो चलूँ मैं?”“शीघ्रता क्या?”“वोट दर-दर माँगना है।”“ठीक है तब।”“चलो तुम भी!”“कहाँ इन हालात में!”“क्यों हुआ क्या?”“समय ही बतलाएगा।” “मान लूँ गद्दार हो?”“हुआ खुदमुख्तार हूँ।”“कैसे चुगद हो!”“आप भी कितने प्रमद हो!”“बाद में बतलाऊँगा!”“वह वक्त अब आना … Read more

लोकतंत्र की नई पौध

उमेश चौहान

लगता है भारत में अबलोकतंत्र की नई पौधजमीन पकड़ने लगी हैचलो सींचे इसे जरूरत भरडालते रहें इसमें खाद-पानी चुनाव-दर-चुनावताकि लहलहा उठे यह फसल भरपूरक्योंकि देश की जनता अब जागरूकता के साथअच्छी उपज वाली फसल की तलाश में हैभले ही वह अभी भी चुनती रहती है यहाँ-वहाँअपनी ही जाति-बिरादरी का नेताऔर देती है बार-बार खंडित जनादेश … Read more

लक्ष्मण-रेखाएँ

उमेश चौहान

जो हमेशा अपनी हद में रहता हैवह प्रायः सुरक्षित बना रहता हैलेकिन इतिहास का पन्ना नहीं बन पाता कभी भीजो हदें पार करने को तत्पर रहता हैउसी के लिए खींची जाती हैं लक्ष्मण-रेखाएँजो वर्जना को दरकिनार कर लाँघता है ये रेखाएँवही पाता है जगह प्रायः इतिहास के पन्नों पर। इस देश में ऐसे महापुरुषों की … Read more

रोओ

उमेश चौहान

रोओ, इस देश की दुर्गाओ, चंडियो, महाकालियो!रोओ, क्योंकि रोना ही बचा है नियति मेंतुम्हारी और हमारी भी। रोओ, क्योंकि भूखा है देश यहसिर्फ पेट का ही नहींहर तरह की निर्लज्जता दिखाने का भी। रोओ कि विश्व के बलात्कारियों की राजधानी बन चुकी है दिल्ली,रोओ कि घर से लेकर भरी सड़कों तक कहीं भी महफूज नहीं … Read more

म्वार देसवा हवै आजाद (अवधी)

उमेश चौहान

म्वार देसवा हवै आजाद,हमार कोउ का करिहै । कालेज ते चार-पाँच डिग्री बटोरिबै,लड़िबै चुनाव, याक कुरसी पकरिबै,कुरसी पकरि जन-सेवक कहइबै,पेट्रोल-पंपन के परमिट बटइबै,खाली गुल्लक करब आबाद,हमार कोउ का करिहै ॥ गांधी रटबु रोजु आँधी मचइबै,किरिया करबु गाल झूठै बजइबै,दंगा मचइबै, फसाद रचइबै,वोटन की बेरिया लासा लगइबै,फिरि बनि जइबै छाती का दादु,हमार कोउ का करिहै ॥ … Read more