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औरत जो नदी है | Jayashree Roy | Short Stories

मार्च का महीना – हमेशा की तरह उदास और उलंग… धूल के अनवरत उठते बवंडर के बीच पलाश की निर्वसन डालों पर सुलगते रंगों की अनायास खुलती गाँठें और हवा में उड़ते सेमल के रेशमी फूलों के दिन – सपनों के अँखुआने और निःशब्द झर जाने का वही वेमुरव्वत मौसम… ये सिरे से उदास हो […]