इंतजाम

जिल की निगाहें अपनी बेटी पर लगी हैं।

आज शुक्रवार है। घर की परंपरा यही है कि शुक्रवार की शाम एलिसन, उसका पति पीटर, पुत्र टॉम और पुत्री टीना चारों माँ के घर आ जाते हैं और रात का भोजन वहीं करते हैं। जिल ने बेटी की शादी के वक्त अपने दामाद के सामने यही शर्त रखी थी कि जब-जब शुक्रवार की शाम एलिसन का परिवार लंदन में होगा, तो सभी लोग ममी-पापा के साथ ही डिनर करेंगे।

डाइनिंग टेबल पर हल्के नीले रंग का मेजपोश; जिल ने चिकन हॉटपॉट बनाया है। साथ में ब्रॉकोली, गाजर, मटर की उबली हुई सब्जी है। पीटर अपने साथ बोरदो व्हाइट वाइन मेन सैंसैक रोज 2006 ले आया था जिसे आते ही फ्रिज में सीधा लिटा कर रख दिया था। वही वाइन की बोतल इस वक्त गिलासों में उड़ेली जा रही है। जिल को दामाद की इस छोटी सी बात से ही अपार सुख मिल जाता है।

टैरेंस के सामने यह सिलसिला दो साल तक चला और फिर टैरेंस ही चल दिया। एलिसन जवान हो गई थी मगर अभी जिल बूढ़ी नहीं हुई थी। अकेलापन खाने को दौड़ता था। जिल चाहती थी कि हर शाम शुक्रवार की शाम हो जाए। एलिसन और उसका पति हर रोज उसके साथ ही खाना खाया करें। टॉम तो टैरेंस के सामने ही पैदा हो गया था। टीना के जन्म की साक्षी केवल जिल ही थी। पीटर भी अपने दफ्तर के काम से स्कॉटलैंड गया हुआ था।

डाइनिंग टेबल के हेड पर कुर्सी आज भी खाली रखी जाती है। उस कुर्सी पर हमेशा टैरेंस बैठा करता था। जिल हमेशा ही अपने पति की दाईं ओर बैठा करती थी – आज भी वहीं बैठती है। उसने पीटर से कहा भी कि वह अब पापा की सीट पर बैठ जाया करे, मगर पीटर रस्मी चीजों से दूर ही रहता है। जिल हमेशा ही खूबसूरत कपड़े से बने छोटे-छोटे तौलिए बनाती है ताकि खाने के बाद उनसे हाथ पोंछे जा सकें। उन तौलियों पर स्वयं खूबसूरत कढ़ाई करती है। फिर नीले रंग के चूड़ियों जैसे छल्लों मे उन्हें गोल करके रखती भी है। किंतु पीटर के अतिरिक्त और कोई भी उनसे हाथ नहीं पोंछता। वे जैसे रखे जाते हैं ठीक वैसे ही उठा दिए जाते हैं। सभी लोग पेपर नैपकिन से हाथ पोंछ लेते हैं।

जिल ने किचन बहुत ही लजीज रंगों से सजाया है। किचन में सफेद, नारंगी और मशरूम रंगों का इस्तेमाल किया है।

अंडरग्राउंड रेलवे की बेकरलू लाइन में ड्राइवर है पीटर। हमेशा चिढ़ाता रहता है एलिसन को, “तुम हाई स्ट्रीट बैंक वाले कोई बैंकर थोड़े ही हो। तुम लोग तो बस दुकान चला रहे हो। …अरे काम तो हम लोग करते हैं।” एलिसन बहुत गर्व से अपनी सहेलियों को बताती है कि उसका पति रेलगाड़ी चलाता है। उसे बचपन से ही चाह थी कि उसका पति जो भी हो वह इंजन चलाता हुआ आए। आज की रेलगाड़ी में इंजन तो होता नहीं, मगर रेलगाड़ी तो है।

एलिसन को बोलने में हमेशा झिझक होती है। वह बेचारी ‘स’ को ‘फ’ बोलती है। झिझकती है बात करने में। क्लास में हमेशा बच्चे उसका मजाक उड़ाते थे। हीन भावना की शिकार हो जाती थी। हमेशा जिल ही उसे हौसला देती। बचपन से ही उससे अपना नाम बार-बार बुलवाती थी – एलिफन। जिल को अपने नाम से परेशानी होने लगती है। भला क्यों उसके नाम में ‘स’ नहीं आता? जैसे एलिसन अपने पापा को टैरेंफ कहती थी उसे भी तो ‘फ’ लगा कर कुछ कह सकती थी। उसने अपने बच्चों के नाम ऐसे रखे थे ताकि उनमें ‘स’ अक्षर आए ही नहीं। बहुत धीमे सुर में बात करती है। बचपन से ही जिल ने स्पीच-थिरेपिस्ट से अपनी पुत्री का इलाज करवाना शुरू कर दिया था। शुरू-शुरू में काफी फायदा हुआ मगर फिर जैसे सब थम सा गया। एलिसन अपने आपको एली कहने लगी है। एलिफन कहने में शर्मिंदगी महसूस करती थी।

पीटर ने जब एलिसन को शादी के लिए प्रोपोज किया था, वह उस समय बेकार था। सोशल सिक्योरिटी के पैसों पर जिंदगी बिता रहा था। एली को देखते ही उसके दिल के तार एक ऐसा संगीत बजाने लगे जो उसने पहले कभी नहीं सुना था। उसे पहले तो यह संगीत समझ ही नहीं आया क्योंकि यह न तो जैज था और न ही डिस्को। यह सीधा सादा क्लासिकल भी तो नहीं था। इस संगीत की एक-एक थाप के साथ पीटर जैसे उड़ने लगता था।

एली का साथ पीटर के लिए भाग्यशाली भी साबित हो रहा था, “एली, तुम मुझे कितना प्यार करती हो। अगर तुम बैंक में नौकरी न करती होती तो भला हम दोनों जिंदगी कैसे बिता पाते? तुम बेटी का सारा खर्चा भी उठाती हो।”

“तुम इतने फार्मल न बनो पीटर। हमने एक दूफरे की नौकरियों के साथ तो प्यार नहीं किया न। इनसान नौकरी इसलिए करता है क्योंकि उसका परिवार होता है। कोई इसलिए शादी नहीं करता क्योंकि उसके पास एक नौकरी भी है।”

पीटर का जीवन पटरी पर चलने लगा था जब उसे रेलवे में नौकरी मिल गई। रेलगाड़ी चलाने का काम। बचपन से ही इंजन ड्राइवर बनने के सपने देखा करता था। एली उसकी इस महत्वाकांक्षा से भली-भाँति परिचित थी। उसे हमेशा प्रोत्साहित भी करती थी। पीटर ने अपनी महत्वाकांक्षा पूरी भी कर ली। मगर दो बच्चों को जन्म देने के बाद एलिसन के शरीर की बनावट पटरी से उतरने लगी। वह साइज बारह के कपड़े पहनने वाली एली नहीं रही। अब उसे साइज अट्ठारह के कपड़े खरीदने पड़ते हैं, “एली, तुम्हारा वजन बढ़ता जा रहा है। …तुम मोटी होती जा रही हो …अपने शरीर का ध्यान रखा करो।”

“क्या फर्क पड़ता है? अरे मैं तो पतले बदन से भी तुमको ही प्यार करती हूँ और अब मोटी हो रही हूँ, तो भी तुमको ही प्यार करती हूँ।”

“मगर मुझे अच्छा नहीं लगता कि मेरी बीवी देखने में रेलगाड़ी का इंजन लगे। थोड़ा स्मार्ट दिखो न! अपने लिए न सही, मेरे लिए ही सही। जिम जाया करो। खाने में बदलाव लाओ। ऐसे नहीं चलेगा। तुम वोदका तो बिल्कुल बंद ही कर दो। हर एक पैग के साथ एक गिलास कोकाकोला या पेप्सी का लेती हो। दोनो शुगर से भरपूर होती हैं। फिर खाने के साथ वाइन अलग लेती हो। …मैं कुछ नहीं जानता। तुमको वजन तो कम करना ही होगा।” पीटर की झुंझलाहट साफ सुनाई दे रही थी।

एलिसन परेशान!

परेशान तो जिल भी है! अपनी बेटी के पीले पड़ते चेहरे से परेशान। जैसे अचानक खुशी उससे नाराज होकर उसका साथ छोड़ गई है। समझ नहीं पा रही है। पीटर उसे प्यार भी करता है। एक बेटा एक बेटी – दुनिया का कोई भी इनसान ऐसे जीवन से भला असंतुष्ट कैसे रह सकता है।

फिर एलिसन की समस्या क्या है? पीटर के साथ उसका प्रेम-विवाह हुआ है। दोनों एक दूसरे को कब से जानते हैं। यह कैसा गम है जो कि एलिसन को खाए जा रहा है। आजकल अचानक उसके पेट में दर्द उठने लगता है। चेहरे पर एक खालीपन सा चिपका रहता है।

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बच्चे किसी बात पर रो देते हैं तो एलिसन उनकी पिटाई करने से भी बाज नहीं आती। भला इतनी परेशान क्यों रहने लगी है? कहीं कुछ तो है जो उसे खाए जा रहा है। उसने दो-एक बार पूछने का प्रयास भी किया, माँ, आप नाहक परेशान न हुआ करें। छोटी-मोटी बातें तो चलती ही रहती हैं।

जिल जानती है कि बात छोटी-मोटी है नहीं। कहीं एलिसन का मोटा होना ही तो इस बात का मुख्य मुद्दा नहीं है। बेबी-फैट तो पहले ही से उसके बदन पर महसूस हो जाती थी। अब दो-दो बच्चे पैदा होने के बाद एलिसन का बदन थोड़ा भारी हो गया है। पीटर आज भी जिम जाने में कभी नागा नहीं करता। उसका बदन गठीला भी है और कसाव लिए भी। तो क्या पीटर को अब एलिसन को प्यार करने का दिल नहीं करता। पीटर तो ट्रेन ड्राइवर है। कितनी लड़कियाँ साथ काम करती हैं। कितने यात्रियों से मिलता होगा। ट्रेन ड्राइवर पर तो वैसे ही लड़कियाँ बहुत मरती हैं। कहीं कोई लड़की इन दोनों के जीवन के बीचों-बीच तो नहीं आन खड़ी हुई।

एक लड़की उसके अपने और टैरेंस के बीच भी तो आ खड़ी हुई थी। उसने तो जनरल हॉस्पिटल नाम के सीरियल में एक्टिंग भी की थी। छोटी-मोटी टीवी स्टार थी। क्या उसके अपने जीवन की कहानी एक बार फिर दोहराई जाएगी। टैरेंस रात को ग्यारह बजे से पहले घर ही नहीं आता था। दोनों के बीच से सेक्स तो गायब ही हो गया था। जिल के लिए इस स्थिति को स्वीकार कर लेना कोई आसान बात नहीं थी।

उसे बचपन से सिखाया गया था कि परिवार एक महत्वपूर्ण संस्था है और उसे बचाए रखना है। बेचारी जिल! समझ नहीं पाती थी कि परिवार को बचाए रखने का दायित्व उस पर ही क्यों है? टैरेंस क्यों इस बात को नहीं समझ पाता।

यदि समझदार होता तो यह नौबत ही क्यों आती। सप्ताह, महीने, साल बीतने लगे। अकेलापन जिल को सालता रहता। टैरेंस बस पैसे लाता, घर को चलाता। जिल का बदन उपेक्षा से जलता रहता, तरसता रहता। टैरेंस ने जिल को चेतावनी भी दी थी कि वह थुलथुल होती जा रही है। मगर जिल ने बात सुनी नहीं थी या शायद सुनी थी मगर समझी नहीं थी। जब तक उसे समझ आती टीवी सेलेब्रिटी एमा टैरेंस के जीवन में आ चुकी थी।

अब घुसपैठ हो चुकी थी। जिल के जिमनेजियम जाने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था। जिल खाने पर टैरेंस की प्रतीक्षा करती। फिर अकेली ही खा लेती। बिस्तर पर इंतजार करते-करते कब नींद आ जाती पता ही नहीं चलता। मगर टैरेंस फिर भी नहीं आता। उसके आने और जाने के बीच का वक्त जिल के लिए और भी अधिक कष्टदायक होता। जिल एमा से मिल चुकी थी। समझती थी कि एमा को देख कर कोई भी मर्द दीवाना हो जाएगा। मगर ऐसी खूबसूरत लड़की को उसका पति ही क्यों पसंद आया?

एलिसन का पीला होता चेहरा देख कर जिल समझ रही थी कि उसकी पारिवारिक जिंदगी में से एक चीज खत्म होती जा रही है। उसे रात को बिस्तर में सेक्स का सुख नहीं मिल रहा। पीटर अपनी नई सहेली के साथ ही तृप्त हो कर घर देर से आता होगा। फिर भला मुटाती हुई एलिसन में उसे क्या दिलचस्पी हो सकती है। कहीं एलिसन भटक तो नहीं जाएगी? भला कब तक इस बेइज्जती को सहती रहेगी। औरत के लिए बिस्तर में अनादर से अधिक दुखदाई भला क्या हो सकता है?

यदि एलिसन को पति से शरीर का सुख नहीं मिलता तो क्या उसे बाहर खोजने को भटकना कह सकते हैं? पीटर अपनी पत्नी के मोटा होने के कारण बाहर सेक्स खोजे तो जायज है मगर एलिसन क्या करे…? नहीं… वह अपनी बेटी को इस तरह सुबक-सुबक कर जिंदगी नहीं जीने देगी।… जिल ने स्वयं भी इस अन्याय के विरुद्ध निर्णय लिया था और उसके अपने जीवन में जेम्स चला आया था – उस से सात वर्ष छोटा जेम्स!

जिल की मानसिकता परिवार तोड़ने वाली नहीं थी। फिर उसका पति भी परिवार तोड़ने की बात नहीं कर रहा था। वह अपने प्यार में व्यस्त था और जिल अकेली तड़पती थी। पहली बार जब जेम्स से मुलाकात हुई तो उसके मन में कुछ भी नहीं हुआ था। एक पार्टी में ही तो मिली थी उससे। जेम्स बहुत प्यार से जिल के लिए मार्टिनी बना कर लाया, “जिल, मैं हमेशा इस बात की कल्पना किया करता था कि मेरा उम्र में अपने से बड़ी महिला के साथ इश्क हो जाए।… पत्नी का प्यार और माँ का दुलार एक ही जगह मिल जाए।… मैनें तुम्हें दो-तीन बार वेस्पर कल्ब में ड्रिंक करते देखा। तुम हर बार अकेली ही थीं। तुम्हें दूर से निहारा करता था।”

“मैंने आमतौर पर मर्दों को अपने से बहुत छोटी लड़की की तरफ आकर्षित होते तो देखा है। मगर अपने से बड़ी औरत के सपने देखना…! मैं कुछ समझ नहीं पाई।”

“दरअसल मैं औरों से कुछ हट कर हूँ। मुझे हमेशा लगता है कि अपने से बड़ी औरत मेरे भीतर की झिझक को दूर कर देगी। …वह पहले ही से खेल को समझती और जानती हैं। उसे अपने से छोटे पुरुष के साथ प्रेम करके एक विशेष अनुभूति होती है – एक नया अनुभव। इसलिए मुझे लगता है कि मुझ से बड़ी महिला मुझे प्रेम में इतना सब दे पाएगी जिसके लिए मुझसे छोटी लड़की केवल हक जताएगी या फिर लड़ाई करेगी।”

जेम्स की बातें सुन कर जिल के मन में कुछ ऐसा महसूस होने लगा जो उसे पहले कभी नहीं हुआ था। टैरेंस कैथॉलिक है। बाद में तो उसमें बहुत बदलाव आए, किंतु जिल के साथ विवाह के समय वह खासा पुरातनपंथी था। शारीरिक संबंधों के मामले में भी वह कैथॉलिक धर्म की बात करता था, “देखो जिल, जहाँ तक सेक्स का सवाल है, इसका मूल काम है बच्चे पैदा करना। जैसे इस धरती पर सभी जानवर बच्चे पैदा करने के लिए सेक्स करते हैं, ठीक वैसे ही मनुष्य को भी करना चाहिए। ये फैमिली प्लानिंग वगैरह के मैं सख्त खिलाफ हूँ।”

डर गई थी जिल। यह सोच कर ही परेशान हो उठती कि यदि फैमिली प्लानिंग नहीं हुई तो वह तो हर साल गर्भवती होती रहेगी। पति से कहे तो कैसे। जिल हमेशा ही गृहिणी रही। उसे न तो नौकरी की इच्छा होती थी और न ही किसी तरह के बिजनस में उसकी कोई रुचि थी। बस घर चलाती थी, टैरेंस और एलिसन की देखभाल करती थी। उसकी फैमिली प्लानिंग की अर्जी शायद कहीं ऊपर से ही मंजूर हो गई थी। किसी इंफेक्सन के चलते उसकी बच्चेदानी ही निकाल देनी पड़ी थी। बेचारा कैथॉलिक धर्म बच्चेदानी के साथ ही शरीर से बाहर चला गया था।

जेम्स कितना समझदार है। जिल उसके बारे में ‘था’ तो कह ही नहीं सकती। आज भी, अपने परिवार के होते हुए भी, जेम्स जिल के काम आता है। उसने अपने रिश्ते की मर्यादा रखी है। जिल ने भी कभी उस पर कोई दबाव नहीं डाला। यह नहीं सोचा कि अब तो टैरेंस है नहीं, जेम्स को चाहिए कि यहीं आ कर बस जाए। उसने जेम्स को अपना जीवन जीने दिया है और स्वयं अपना जीवन जी रही है। बस जेम्स ने जो खाली स्थान उस समय भरा था, आज भी भर रहा है।

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कितना खालीपन था जिल के जीवन में! उसके आसपास सन्नाटे का साम्राज्य था। सन्नाटा जो कभी ठोस हो जाता तो कभी तरल…! बैठे-बैठे सन्नाटा नटखट हो जाता फिर वापिस गंभीर! सन्नाटे के साथ खेलना, उससे डरना, उससे बातें करना सभी जिल के जीवन का हिस्सा बन गए थे। सन्नाटा कभी उसका मजाक उड़ाता तो कभी उसका दर्द बाँटता। एक विशेष किस्म का रिश्ता बन गया था जिल का सन्नाटे के साथ। सन्नाटे की इस दीवार में से एक दिन निकल आया था जेम्स, जिसके आने के बाद सन्नाटे में एक खास तरह का संगीत सुनाई देने लगा था।

जिल अब हर वक्त एक खुमारी सी में रहती थी। चेहरे पर एक मुस्कुराहट सदा विराजमान। टैरेंस अगर अपने चक्करों में न फँसा होता तो अवश्य ही उसे दिखाई देता कि जिल किसी और ही दुनिया में रहने लगी है। जिल को अब शुक्रवार की प्रतीक्षा रहती। टैरेंस शुक्रवार की शाम चला जाता और रविवार को देर रात या फिर सोमवार को ही लौटता। यह समय जैसे जिल के लिए दुनिया भर की रूहानी किताबों में दर्शाई जन्नत का समय होता। एलिसन को शनिवार की सुबह कॉलेज भेजने के बाद जिल का सारा समय जेम्स के साथ ही बीतता।

जेम्स को मछली खाने का बहुत शौक है। उसकी खास पसंद है प्लेन मछली। अब भी हर शनिवार को वही मछली पकाती है। आज भी जेम्स शनिवार दोपहर का भोजन जिल के साथ करता है। जिल के चेहरे पर एक शाश्वत जवानी आ कर चिपक गई है। जो भी देखता है यही सवाल पूछता है, “आप चेहरे पर क्या लगाती हैं? भला आपके चेहरे की त्वचा इतनी चमकती कैसे है?”

केवल जिल ही जानती है कि चाहे जेम्स ने उसे एक बार भी नहीं कहा कि वह उसे प्यार करता है, फिर भी उसने जो कुछ जिल के लिए किया है, वह तो उसके विवाहित पति ने भी नहीं किया। अचानक जिल के अंदर की कवियत्री मुखर हो उठी है। जो कविताएँ उसने कभी स्कूली जीवन में लिखी थीं, उन कविताओं में से अचानक एक नई जिल जाग उठी।

जेम्स नई पीढ़ी का लड़का है। उसने जिल को उन भावनाओं से परिचित करवाया जिनसे वह सर्वथा अनजान थी। उसके खाने पहनने में भी बदलाव आ गया है। घर के मीनू से लाल मीट जैसे गायब ही हो गया है। बीफ, पोर्क या लैंप अब घर में नहीं पकते। चिकन या फिश के ही अलग-अलग पकवान बनने लगे हैं।

जिल ने कभी भी इस रिश्ते को कोई नाम देने का प्रयास नहीं किया। दोनों की एक ही सोच – नाम में क्या रखा है! किंतु एक बात तय थी कि जो रिश्ता केवल जिल को शारीरिक खुशी देने के लिए शुरू हुआ था, उसका स्वरूप बदलता जा रहा था। अब दोनों एक दूसरे की प्रतीक्षा करते; साथ ही साथ कुछ यूँ भी होने लगा था कि दोनों को एक दूसरे के शरीर से प्यार भी होने लगा था। यह प्यार एक अलग किस्म का प्यार था। इस प्यार में जलन या ईर्ष्या के लिए कोई स्थान नहीं था। कहीं भी यह माँग नहीं थी कि अपने-अपने साथी से मुक्ति पाई जाए और इकट्ठे एक छत के नीचे रहें। कहीं अपने प्यार का चर्चा नहीं; किसी से बात नहीं, बस क्रिसमिस पर एक-दूसरे को भेंट और अपना-अपना जन्मदिन साथ मनाना। उससे आगे कुछ भी नहीं। यहाँ तक कि बिना किसी काम के एक दूसरे को फोन तक नहीं करते थे, किंतु एक-दूसरे की आवश्यकता के बारे में पूरी जानकारी रहती।

एक बार बिस्तर में निरादर होने के बाद जिल ने कभी अपने पति को अपने शरीर के निकट नहीं आने दिया, “अब तुम में बचा ही क्या है? …यू बोर मी जिल…! तुम अब मुझ से कोई उम्मीद न किया करो। मुझे अपनी जिंदगी जीने दो और तुम अपना कुछ और इंतजाम कर लो। मुझे कोई दिक्कत नहीं होगी।”

इंतजाम! यही तो किया था जिल ने। …इंतजाम…! जेम्स उसका इलाज था – उसके अकेलेपन, निराशा और डिप्रेशन का इलाज। उसे याद भी नहीं आता कि उसका पति टैरेंस किसी और महिला के साथ रंगरलियाँ मना रहा है। उसे उस सेलेब्रिटी से जरा भी जलन नहीं होती क्योंकि जेम्स पति न होते हुए भी उन अँधेरे पलों में वह सब जिल को दे जाता था जो टैरेंस बरसों सूरज के उजाले में नहीं दे पाया।

हाँ, जिल और जेम्स दिन के अँधेरे में ही तो मिला करते थे। दोनों को एक दूसरे के बदन की खुशबू की इस कदर पहचान हो गई थी कि आँखें बंद करके भी एक दूसरे को पहचान सकते थे। दोनों वाई.एस.एल. कंपनी का कोलोन ही इस्तेमाल करते हैं। जेम्स के कपड़ों और बदन से क्युरोज की खुशबू आती है तो जिल का जिस्म ओपियम की महक से महक रहा होता। दोनों खुशबुएँ घंटों गुत्थमगुत्था होती रहतीं। फिर दोनों मिलकर एक नई खुशबू का माहौल पैदा करतीं जिसमें मुहब्बत का रंग जुड़ा होता। ये खुशबू बहुत रंगीन होती।

जिल ने हमेशा चाहा कि जेम्स के बारे में किसी को भी पता न चले। किंतु इनसान जो चाहता है, सदा वैसा ही होता तो नहीं है न? बहुत पुरानी कहावत है कि ‘इश्क ते मुश्क छुपे नहीं छुपदे…’ एलिसन को खबर हो गई। किंतु एलिसन पहले से ही अपनी माँ के हालात से परिचित थी। उसके मासूम सवाल ने जिल को सहारा दिया, “मॉम, अब अच्छा लगता है क्या? डू यू लाइक जेम्स…?”

जिल ने एलिसन को सीने से चिपका लिया था। मौन की भाषा दिलों की धड़कन से आपस में ही प्रेषित हो गई। माँ का राज अपने सीने में छिपा लिया था बेटी ने। कोई दूसरा सवाल नहीं। एलिसन को अपने पिता से शिकायत थी – माँ से सहानुभूति। माँ का दर्द उसका अपना दर्द। वह नारी-सुलभ मन से अपनी माँ का दर्द महसूस करती। बहुत बार चाहा भी कि पिता से अपनी माँ के बारे में बात करे। मगर ऐसा कुछ हो नहीं पाया। वह चर्च भी गई। मदर मेरी से बातें भी की। उनको माँ की हालत के बारे में बताया भी, किंतु मदर मेरी के पास कितनी नारियों की समस्याओं की एक लंबी सी लिस्ट रही होगी। अभी तक उसकी माँ का नंबर नहीं लगा था। वह जेम्स को अपनी प्रार्थनाओं का नतीजा ही मानती है। अपनी माँ से भी साफ साफ कह देती है, “माँ, जेम्स को मदर मेरी ने खुद ही आपके लिए भेजा है। आपकी फारी प्रॉब्लमस का एक ही इलाज है। तुमको सच बताऊँ माँ मुझे जेम्स के साथ तुम्हें देख कर कभी भी बुरा नहीं लगता।”

जिल के लिए जेम्स का आना एक वरदान था। दोनों के जिस्म और आत्मा एक हो गए थे मगर दोनों में कहीं दूसरे से किसी तरह की प्रतिबद्धता का आग्रह नहीं था। दोनों के मन में बस एक ही भावना, कि एक दूसरे को सुख देना है। शरीर का वह सुख जो पाना तो हर मर्द चाहता है मगर देने के वक्त कंजूस हो जाता है। जेम्स में एक विचित्र भावना महसूस की थी जिल ने – उसका मुख्य उद्देश्य रहता कि प्रेम प्रक्रिया में जिल अपनी भावनाओं की पराकाष्ठा तक पहुँच जाए। जिल हैरान भी होती, “तुम अपने आपको इस तरह कैसे रोके रखते हो…? तुम मेरा इतना ख्याल कैसे कर लेते हो?”

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“जिल सच तो यह है कि दुनिया भर में बहुत कम पुरुष इस बात से परिचित हैं कि रति क्रीड़ा में महिला भी किसी तरह की खुशी महसूस करती है। उन्हें लगता है कि काम में चरम स्थिति तक केवल वही पहुँच सकता है। यदि पुरुष एक बार तय कर ले कि उसे अपनी पत्नी के सुख का भी ख्याल रखना है, तो शायद पत्नी को हर बार सुख का अहसास होने लगे।”

हैरान सी जिल बस एकटक जेम्स को निहारती रहती; उसकी बातें सुनती रहती।

जिल जानती थी कि टैरेंस एक दिन हार कर, टूट कर वापिस उसके पास आएगा। किंतु वह उसे माफ करने को बिल्कुल तैयार नहीं थी। उसने एक टीवी की छोटी-मोटी एक्ट्रेस के लिए अपने परिवार को गाली दी थी। अपने बच्चों की माँ का बिस्तर में निरादर किया था। और फिर अपने लव-अफेयर को बड़ी शान से सब के सामने खुले रूप में बताया था। भला यह क्या बात हुई। अगर आपकी रखैल टेलिविजन की छोटी-मोटी स्टार है तो क्या आपको गंदगी करने का लाइसेंस मिल गया। ऐसे थोड़े ही परिवार चलाया जाता है।

जिल का विद्रोह उसके हर काम में दिखाई देने लगा था। अपने बेडरूम का रंग टैरेंस ने तय कर रखा था – नीला। उसे केवल नीले रंग की दीवारें ही अच्छी लगती थीं। नीले पर्दे… नीला बिस्तर… वह अपने सोने के कमरे में बस नीला रंग ही देखना चाहता था।

जेम्स ने कमरे में घुसते ही कहा था, “आप लोग बहुत ही ब्लू मूड में रहने के आदी लगते हैं। अरे भाई ब्राइट-ब्राइट दिखो, कोई ऐसा रंग इस्तेमाल करो जिससे कि जिंदगी उजली लगे – रोती हुई नहीं। “

“तुम्हें कौन सा रंग अच्छा लगता है जेम्स?”

“मेरी चिंता छोड़िए। मैं तो सफेद रंग पसंद करता हूँ। सोचिए आप सफेद रंग में लिपटी, सफेद बिस्तर, आपका दूधिया बदन और सफेद दीवारें, सफेद पर्दे – लगेगा जैसे जन्नत में उड़ते जा रहे हों।”

जिल ने महसूस भी किया था कि जेम्स हमेशा सफेद कमीज या टी-शर्ट ही पहन कर उससे मिलने आता था। उसने विरोध का बिगुल बजा दिया था। अपने बेडरूम में सफेद रंग का वॉल-पेपर लगाना शुरू कर दिया। शुक्रवार शाम को ही जेम्स आ गया। जेम्स, जिल और एलिसन ने मिल कर शनिवार रात तक कमरे के वॉल-पेपर बदल कर सफेद कर डाले। पर्दे भी सफेद लगा दिए और बिस्तर भी सफेद। लगा जैसे कि उजलेपन की बरसात हो रही है।

टैरेंस के लिए झटका था ये सफेद रंग, “ये क्या किया तुमने? तुम जानती हो कि मुझे बेडरूम का रंग सिर्फ नीला ही अच्छा लगता है। …तुम्हारी हिम्मत कैसे हो गई कि तुम मुझसे बिना पूछे इतना बड़ा फैसला कर लो?”

“तुम ने उस कुतिया से इश्क लड़ाते हुए मुझ से इजाजत माँगी थी क्या? बेडरूम मेरा भी है। अगर तुम्हें पसंद नहीं तो लिविंग रूम में सो जाया करो। या फिर जाकर उस कुतिया के साथ ही बस जाओ। अब मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता…।” जेम्स के साथ ने अचानक जिल में एक अजीब किस्म का आत्मविश्वास पैदा कर दिया था। टैरेंस को अपना ही बेडरूम पराया सा लग रहा था। दो अजनबी एक ही बिस्तर पर लेटे हुए थे।

दोनों ने स्थिति को समझ लिया था। अब टैरेंस भी शांत हो गया था और जिल भी। वे बिस्तर पर नदी के दो किनारों की तरह लेटे रहते। क्योंकि दोनों ही शुक्रवार की शाम से लेकर रविवार की रात तक अपना-अपना जीवन अपनी मर्जी से जी लेते थे, इसलिए जिंदगी में कहीं श्रद्धा नहीं उत्पन्न हो रही थी। दो जिंदगियाँ समानांतर चले जा रही थीं। टैरेंस अपनी पत्नी के व्यक्तित्व में आए बदलाव को महसूस कर रहा था मगर समझ नहीं पा रहा था, और जिल के चेहरे पर एक विजयी सी मुस्कान मौजूद थी।

जिल वैसी ही मुस्कान अपनी बेटी एलिसन के चेहरे पर देखना चाहती है। हर रविवार चर्च जा कर अपनी बेटी की खुशी के लिए दुआ माँगती है। अब तो शुक्रवार की शाम एलिसन अकेली अपने बच्चों के साथ डिनर के लिए आने लगी है। पीटर के बारे में कोई बात ही नहीं होती। आँसू एलिसन की आँखों के किनारे पूरी कॉलोनी बसाकर जमा हो गए हैं। पहला मौका मिलते ही आँखों से बाहर आ जाते हैं और एलिसन की नाक को लाल कर देते हैं।

आज जिल को अपनी बेटी का जीवन उसी जगह रुका हुआ महसूस हो रहा है। माँ है, भला बेटी का दर्द कैसे न महसूस करे। उसके पास तो अपना कहने को बस जेम्स ही है। किसी और से तो एलिसन के जीवन के बारे में राय भी नहीं ले सकती। अपनी बेटी के निराश और वीरान हुए चेहरे को देख-देख कर जिल एक बार फिर उसी सन्नाटे के सामने जा खड़ी हुई है। सन्नाटे की दीवार आज और अधिक ठोस लग रही है क्योंकि आज वह दीवार उसकी बेटी को मुँह चिढ़ा रही है।

सोमवार से शुक्रवार की शाम तक तो जिल अपनी बेटी के लिए परेशान रहती ही है; अब तो उसे जेम्स की बाँहों में होने पर भी अपनी बेटी की परेशानी तंग करने लगी है। उसकी जवान बेटी अकेली बिस्तर पर तड़पती है; उसी निरादर की शिकार आज उसकी बेटी है जिसको कभी जिल ने महसूस किया था फिर भला जिल कैसे शरीर का आनंद उठा सकती है।

उसे ही कुछ इंतजाम करना होगा। टैरेंस ने उसे चुनौती दी थी कि अपना इंतजाम खुद कर लो। वह अपनी बेटी के लिए भी कुछ न कुछ इंतजाम कर लेगी। डरेगी नहीं। मगर उसकी पहुँच तो केवल जेम्स तक है। उसकी अपनी पूरी जिंदगी जेम्स के आसपास सिमट कर रह गई है।

जिल के दिमाग में उथल पुथल जारी थी, “जेम्स के दिल में कितना प्यार बसता है! उसका तो पूरा व्यक्तित्व ही प्रेम का पर्यायवाची है। यदि जेम्स मेरे सूने जीवन में प्रेम की कोमल पत्तियाँ पैदा कर सकता है तो फिर एलिसन के जीवन में ऐसा क्यों नहीं हो सकता? हाँ… जेम्स ही सही है… मैं इंतजाम करती हूँ…।

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