चेर्नोबिल की आवाजें

स्वेतलाना अलेक्सियाविच लेखक और कहानीकार से पहले एक पत्रकार हैं। उन्होंने अपनी पत्रकारिता को साहित्य से कुछ ऐसा जोड़ा है जैसा लातिन अमेरिकी कथाकार गाब्रिएल गार्सिया मार्केस और लातिन अमेरिका के ही एक और बड़े लेखक पत्रकार एदुआर्दो गालियानो ने। उनका गद्य बेहद तीक्ष्ण लेकिन ठंडे निर्विकार अंदाज में चीजों और घटनाओं की पड़ताल करता … Read more

शुक्रग़ुजार आँखें | हयातुल्लाह अंसारी

शुक्रग़ुजार आँखें | हयातुल्लाह अंसारी

शुक्रग़ुजार आँखें | हयातुल्लाह अंसारी – Shukragujar Aankhen शुक्रग़ुजार आँखें | हयातुल्लाह अंसारी पिछले मंगलवार, 26 जुलाई सन् 48 से पहले मेरे सीने में तपते हुए सात-सात छाले थे और सातों ने मिलकर दिल को फोड़ा बना दिया था। मां-बाप के कत्ल के छाले, भाई-बहन के कत्ल के छाले, युवा बेटे के कत्ल का छाला, … Read more

माँ-बेटा | हयातुल्लाह अंसारी

माँ-बेटा | हयातुल्लाह अंसारी

माँ-बेटा | हयातुल्लाह अंसारी – Maa Beta माँ-बेटा | हयातुल्लाह अंसारी मोहिना आँधी और पानी में रात-भर भागती रही, ठिठुरती रही और भागती रही। अँधेरा इस गजब का था कि दो कदम आगे का दरख्त तक नहीं सुझाई देता था। खेत और मेढ़, टीला और खाई, पूरब और पश्चिम, ज़मीन और आसमान-सब असीम काली दिशाओं … Read more

सपनों की बाइबिल

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रोजाना सुबह नौ बजे से शाम पाँच बजे तक मैं अपनी सीट पर बैठी दूसरों के ख्‍वाब टाइप करती रहती रही हूँ। मुझे इसीलिए मुलाजिम रखा गया है। मेरे अफसरों का हुक्‍म है कि मैं तमाम चीजें टाइप करूँ। ख्‍वाब, शिकायतें, माँ से मतभेद, बोतल और बिस्‍तर की समस्‍याएँ, बाप से झगड़ा, सरदर्द जो इतना … Read more

यू टर्न | हेमलता महिश्वर

यू टर्न | हेमलता महिश्वर

यू टर्न | हेमलता महिश्वर – U Turn यू टर्न | हेमलता महिश्वर हमेशा की तरह शाम तो काफी हो गई थी बल्कि कहना चाहिए कि अँधेरा ही घिर आया था जब मैंने घर के भीतर कदम रखा। बच्चे भी कार पार्किंग करते समय बाहर निकल कर आ गए। ”मम्मी आ गईं… मम्मी आ गईं…” … Read more

इस्माइल शेख की तलाश में |होमन बरगोहात्री

इस्माइल शेख की तलाश में |होमन बरगोहात्री

इस्माइल शेख की तलाश में |होमन बरगोहात्री – Ismail-Sheikh-Ki-Talash-Me इस्माइल शेख की तलाश में |होमन बरगोहात्री मैं शायद स्थान-काल-पात्र सब कुछ भूलकर नगर के व्यस्ततम राज-पथ के बीचोबीच खड़ा आसपास के लोगों को अचरज में डाल शरीर की पूरी शि€त के साथ पुकार उठा था-‘इस्माइल!’-पुकार खत्म हुई नहीं कि मैंने दौड़ना शुरू कर दिया था। … Read more

गोल खंडहर | होर्हे लुईस बोर्हेस

गोल खंडहर | होर्हे लुईस बोर्हेस

गोल खंडहर | होर्हे लुईस बोर्हेस – Gol Khandahar गोल खंडहर | होर्हे लुईस बोर्हेस उस रात किसी ने उसे नाव से सरककर तट पर आते हुए नहीं देखा। किसी ने भी बाँस की उस नाव को उस पवित्र कीचड़ में धँसकर डूब जाते हुए नहीं देखा। लेकिन कुछ ही दिनों के भीतर वहाँ रहने … Read more

सूने समंदर और किनारे | हुश्न तवस्सुम निहाँ

सूने समंदर और किनारे | हुश्न तवस्सुम निहाँ

सूने समंदर और किनारे | हुश्न तवस्सुम निहाँ – Sune Samandar Aur Kinare सूने समंदर और किनारे | हुश्न तवस्सुम निहाँ सवा साँझ से ही उनके भीतर गर्म खुशबुएँ उठने लगती हैं। कमोवेश वैसे, जैसे झुटपुटे में रातरानी रह-रह के महकती जाए या जैसे पावस की रात में भीगे-भीगे नम स्पर्श। आठ साल की उम्र … Read more

विखंडित होने की ऋतु | हुश्न तवस्सुम निहाँ

विखंडित होने की ऋतु | हुश्न तवस्सुम निहाँ

विखंडित होने की ऋतु | हुश्न तवस्सुम निहाँ – Vikhandit Hone Ki Rtu विखंडित होने की ऋतु | हुश्न तवस्सुम निहाँ आज, उसे जेल की सलाखों के पीछे देख अंतस किसी अव्यक्त पीड़ा से रुंध गया। पूरे नौ वर्ष बाद हमारी मुलाकात हुई थी। मुलाकात क्या कुछ पल आमने-सामने रहे। एक मित्रा से भेंट करने … Read more

ये बेवफाइयाँ | हुश्न तवस्सुम निहाँ

ये बेवफाइयाँ | हुश्न तवस्सुम निहाँ

ये बेवफाइयाँ | हुश्न तवस्सुम निहाँ – Ye Bevaphaiyaan ये बेवफाइयाँ | हुश्न तवस्सुम निहाँ मेरे दोनों शौहर आपस में भिड़े पड़े थे और मैं तकिए के गिलाफ में बूटें काढ़ती हुई मजे ले रही थी। दोनों का झगड़ा कई-कई जावियों पर चल रहा था। मुँह जबानी भी, हाथापाई भी और अदालती भी। खूब गले … Read more