हाथ से फिसलती जमीन

“ग्रैंडपा, आपके हाथ इतने काले क्यों हैं…? आपका रंग मेरे जैसा सफेद क्यों नहीं है…? आप मुझ से इतने अलग क्यों दिखते हैं?” एंजेला के ये शब्द उसके दादा जी के दिल को जैसे छील गए। क्या इतिहास फिर अपने आपको दोहराने जा रहा है? नरेन भारत छोड़कर ब्रिटेन इसी चक्कर में तो आकर बस … Read more

यह सन्नाटा कब टूटेगा…?

आज फिर अलार्म सुबह 5.15 पर बज उठा। वह यंत्रवत उठा और अपने ब्लैकबेरी फोन पर अलार्म को डिसमिस कर दिया। उसका सुबह का शेड्यूल हमेशा एकसा ही रहता है। अलार्म बंद करना; बिस्तर से निकलना; बिस्तर को सीधा करना और रजाई को ठीक से बिछाना; फिर एक अँगड़ाई लेना; अपना पायजामा उठा कर पहनना … Read more

पासपोर्ट का रंग

‘मैं भगवान को हाजिर नाजिर जान कर कसम खाता हूँ कि ब्रिटेन की महारानी के प्रति निष्ठा रखूँगा।’ अंग्रेजी में बोले गए ये शब्द एवं इनके बाद के सभी वाक्य पंडित गोपाल दास त्रिखा को जैसे किसी गहरे कुएँ में से आते प्रतीत हो रहे थे। वे हैरो के सिविक सेंटर में बीस पच्चीस गोरे, … Read more

देह की कीमत

परमजीत कौर अपने कमरे में गुमसुम बैठी थी। उसकी आँखें सामने पड़े कलश पर टिकी हुई थीं। उसका दो वर्षीय पुत्र गहरी नींद सो रहा था। कमरे की निस्तब्धता को उसके पुत्र की जुकाम से बंद नाक की साँस की आवाज ही भंग कर रही थी। कमरे का टेलीविजन भी चुप था, टेलीफोन भी गला … Read more

ढिबरी टाइट

गुरमीत एकाएक ठहाका लगाकर हँसा। घर के सभी सदस्य चौंक पड़े। गुरमीत तो लगभग दो वर्ष से दुःख के उस गहरे समुद्र में डूब चुका था, जहाँ से उसे खींचकर निकाल पाना शायद कठिन ही नहीं असंभव -सा भी लग रहा था। फिर वही गुरमीत, एकाएक बच्चों की-सी प्रसन्नता के साथ हँसने और नाचने लगा … Read more

टेलीफोन लाइन

टेलीफोन की घंटी फिर बज रही है। अवतार सिंह टेलीफोन की ओर देख रहा है। सोच रहा है कि फोन उठाए या नहीं। आजकल जंक फोन बहुत आने लगे हैं। लगता है जैसे कि पूरी दुनिया के लोगों को बस दो ही काम रह गए हैं – मोबाइल फोन खरीदना या फिर घर की नई … Read more

चरमराहट

इस समय भी उसे अपना नाम याद नहीं आ रहा था। उसकी आँखों में आँसू आ गए थे – लाल आँसू! वह कभी उस दूर तक फैले मलबे को दख रहा था, तो कभी सामने बने कच्चे-पक्के मंदिर को। उस टूटे हुए मलबे में से रह-रहकर अजान की आवाजें निकलकर जैसे हवा में लहरा रही … Read more

गंदगी का बक्सा

लंदन में हिमपात हुए तो एक अर्सा बीत चुका है। लंदनवासी अब बर्फ देखने के लिए स्कॉटलैंड या अन्य उत्तरी शहरों की ओर जाते हैं। सफेद क्रिसमिस तो अब किताबों, कार्डों, या लोगों की यादों में ही दिखाई देता है। किंतु जया और दिलीप के रिश्तों में जो ठंडापन पैठ गया है, वह जमी हुई … Read more

कोख का किराया

आज मनप्रीत, हारी हुई सी, घर के एक अँधेरे कोने में अकेली बैठी है। वह तो आसानी से हार मानने वालों में से नहीं है। आज तो पूरा कमरा; पूरा घर ही पराजय का पर्याय सा बना हुआ है। सूना, अकेला, सुनसान-सा घर! अभी कल तक तो घर में सब कुछ था – खुशी, प्रेम, … Read more

काला सागर

विमल महाजन ने आज दफ्तर से अवकाश ले रखा था। उन्हें कई दिनों से लग रहा था जैसे उनका शरीर आवश्यकता से अधिक थकता जा रहा है। उन्होंने फैसला किया कि आज केवल आराम ही किया जाए, देर तक सोए। उठकर आराम से सुबह के कामों से निवृत्त हुए, और समाचार-पत्र लेकर बैठ गए। आजकल … Read more