सन्नाटे का संगीत

सन्नाटे का संगीत

अकेली औरतनींद को पुचकारती हैदुलारती हैपास बुलाती हैपर नींद है कि रूठे बच्चे की तरहउसे मुँह बिराती हुईउससे दूर भागती है अपने को फुसलाती हैसन्नाटे को निहोरती हैदेख तो –कितना खुशनुमा सन्नाटा हैकम से कमखर्राटों की आवाज से तो बेहतर है लेकिन नहीं…जब खर्राटे थेतो चुप्पी की चाहत थीअब सन्नाटा कानों कोखर्राटों से ज्यादा खलता … Read more

शतरंज के मोहरे

शतरंज के मोहरे

सबसे सफलवह अकेली औरत हैजो अकेली कभी हुई ही नहींफिर भी अकेली कहलाती है… अकेले होने के छत्र तलेपनप रही हैनई सदी में यह नई जमात –जो सन्नाटे का संगीत नहीं सुनतीसलाइयों में यादों के फंदे नहीं बुनतीकरेले और भिंडी में नहीं उलझतीअपने को बंद दराज में नहीं छोड़तीअपने सारे चेहरे साथ लिए चलती हैकौन … Read more

राखी बाँधकर लौटती हुई बहन

राखी बाँधकर लौटती हुई बहन

रेलगाड़ी के चलते हीफूल बूटे वाले सुनहरे पारदर्शीपेपर में लिपटा तोहफाखोलती है मायके से लौटती बहनअंदर है जरी की पट्टीदार रेशमी साड़ीजिस पर अपनी कमजोर उँगलियाँ फिराते हुएइतरा रही हैसाड़ी की फीरोजी रंगतनम आँखों में तिर रही हैराखी बाँधकर बहनदिल्ली से लौट रही हैअपने शहर सहारनपुर ! कितना मान सम्मान देते हैं उसेकह रहे थे … Read more

यहीं कहीं था घर

यहीं कहीं था घर

ज्यादातर घरईंट गारे से बनी दीवारों के मकान होते हैंघर नहीं होते… जड़ों समेत उखड़करअपना घर छोड़कर आती है लड़कीरोपती है अपने पाँवएक दूसरे आँगन की खुरदुरी मिट्टी मेंखुद ही देती है उसे हवा-पानी, खाद-खुराककि पाँव जमे रहें मिट्टी परजहाँ रचने-बसने के लिएटोरा गया था उसे! एक दिनवहाँ से भी फेंक दी जाती हैकारण की … Read more

भरवाँ भिंडी और करेले

भरवाँ भिंडी और करेले

अकेली औरतपीछे लौटती हैबीसियों साल पहले के मौसम मेंजब वह अकेली नही थीसुबह से फिरकनी की तरहघर में घूमने लगती थीइसके लिए जूसउसके लिए शहद नीबूपलँग पर पड़ी बीमार सासतिपाई पर रखी उसकी दवाइयाँसाहब के कपड़ेबच्चों के यूनीफॉर्मउसके चेहरे पर जितनी भी शिकन आएसाहब और बच्चों के कपड़ों परकोई शिकन नहीं रहनी चाहिए हर पल … Read more

धूप तो कब की जा चुकी है

धूप तो कब की जा चुकी है11

औरत पहचान ही नहीं पातीअपना अकेला होनाघर का फर्श बुहारती हैखिड़की दरवाजेझाड़न से चमकाती हैऔर उन दीवारों परलाड़ उँड़ेलती हैजिसे पकड़कर बेटे नेपहला कदम रखना सीखा था। औरत पहचान ही नहीं पातीअपना अकेला होनाअरसे तकअपने घर कीदीवारों पर लगीखूँटियों पर टँगी रहती है।फ्रेम में जड़ी तस्वीरें बदलती हैऔर निहारती हैउन बच्चों की तस्वीरों कोजो बड़े … Read more

कम से कम एक दरवाजा

कम से कम एक दरवाजा

चाहे नक्काशीदार एंटीक दरवाजा होया लकड़ी के चिरे हुए फट्टों से बनाउस पर खूबसूरत हैंडल जड़ा होया लोहे का कुंडा वह दरवाजा ऐसे घर का होजहाँ माँ बाप की रजामंदी के बगैरअपने प्रेमी के साथ भागी हुई बेटी सेमाता पिता कह सकें –‘जानते हैं, तुमने गलत फैसला लियाफिर भी हमारी यही दुआ हैखुश रहो उसके … Read more

उसका अपना आप

उसका अपना आप

अकेली औरतचेहरे पर मुस्कान की तरहगले में पेंडेंट पहनती हैकानों में बुंदेउँगली में अँगूठियाँऔर इन आभूषणों के साथअपने को लैस करबाहर निकलती हैजैसे अपना कवच साथ लेकर निकल रही हो पर देखती हैकि उसके कान बुंदों में उलझ गएउँगलियों ने अँगूठियों में अपने कोबंद कर लियागले ने कसकर नेकलेस को थाम लिया… पर यह क्या…सबसे … Read more

अकेली औरत का हँसना

अकेली औरत का हँसना

अकेली औरतखुद से खुद को छिपाती है।होंठों के बीच कैद पड़ी हँसी को खींचकरजबरन हँसती हैऔर हँसी बीच रास्ते ही टूट जाती है… अकेली औरत का हँसना,नहीं सुहाता लोगों को।कितनी बेहया है यह औरतसिर पर मर्द के साए के बिना भीतपता नहीं सिर इसका… मुँह फाड़कर हँसतीअकेली औरतकिसी को अच्छी नहीं लगतीजो खुलकर लुटाने आए … Read more

अकेली औरत का रोना

अकेली औरत का रोना

ऐसी भी सुबह होती है एक दिनजब अकेली औरतफूट फूट कर रोना चाहती हैरोना एक गुबार की तरह,गले में अटक जाता हैऔर वह सुबह सुबहकिशोरी अमोनकर का राग भैरवी लगा देती हैउस आलाप को अपने भीतर समोतेवह रुलाई को पीछे धकेलती है अपने लिए गैस जलाती हैकि नाश्ते में कुछ अच्छा पका लेशायद वह खाना … Read more