उम्मीद

उम्मीद 1

जो हैउसकी चिंता करने की क्या जरूरत हैजैसे कि वर्तमान जो नही हैउसे पाने की दौड़ लगाना एक वहशीपन हैजैसे की भविष्य है और नहीं के बीचएक तनाव है यह उम्मीद का तनावऔर इस तनाव के साथ जीते जाने में क्या हर्ज है।

झाड़ू और आदमी

झाड़ू और आदमी

बड़ी गंदगी थी वहाँ पर चारों और का प्लेटफार्म कचरे से भरा थाकुछ लगातार खाए जा रहे थे केलेछिलके थे कि थमने का नाम ही नहीं ले रहे थेभीड़ थी कि बस पूछिए मत! वहीं पास में रखा था एक कूड़ेदानएक पीकदानभीतर से खालीऔर बाहर से भरा हुआ! उसी के पास सो रहा था एक … Read more

दोस्त

दोस्त

१. वह जो कि एक दोस्त थाबहुत चुप था जब दोस्त था सोचा कि चलो थोड़ी दुश्मनी ही कर लेंसुन लें उसे भी कुछ कहे जो वह दोस्त फिर भी चुप रहावह बहुत ही तंगदिल निकलादुश्मनी की सरल भाषा भी नहीं समझता।२.कितना अच्छा था कि हमारे बीच एक बात थीऔर धरती परफिर भी मौन की … Read more

धूप

धूप1

रूप रेत भरधूप खेत भरफैल गई है चादर तानेतट पर सूरज नभ परहाँफ रहा है आशा कर करलौटेगी उसकी यह आभाभर-भर रेतनदी के तट पर पर कैसे लौटेगीछोड़ उम्र भरअभी-अभी तो आई हैधूप कहाँ भेंटीरेती को जी भर!   (‘रेत में आकृतियाँ’ संग्रह से)

पहरे पर पिता

पहरे पर पिता

पिता रात भर खांसते हैं जगते हैं तो समय पूछते हैं सोते हैं तो खर्राटे भरते हैं कभी कभार नहीं नहीं कभी कभी जोर जोर से खांसते हैं जैसे की बचपन में नई नवेली बहुओं के होने पर ओसारे से ही खांसना शुरू करते थे पिता बहुत आश्वस्त हैं अभी भी खांस रहे हैं लेकिन … Read more

पिता की रुलाई

पिता की रुलाई

आजकल पिता बात बात पर रोते हैंरोना जैसे अपने होने को जीना है कहीं कुछ याद आता है तो रोते हैंकहीं कुछ भूल जाता है तो रोते हैं कभी हंस हंस के रोते हैंकभी रो रो के हंसते हैं जब वे रोते हैं तब अपने वर्तमान में होते हैंजब हंसते हैं तब अतीत में अपने … Read more

बच्ची

बच्ची 1

बच्ची को बहलाते-फुसलाते दरिंदों ने जब बलात्कार किया होगा तो अपराध के उस सबसे निरंकुश समय मेंउसके मुख सेदुनिया का जो सबसे पवित्र शब्द निकला होगा माँ… उन्होंने उस शब्द को कैसे सुना होगा उसका गला दबाते समय भी यह शब्द निकला होगा अंतिम बारतो क्या उन्होंने तनिक भी सोचा होगायह एक बच्ची की नहींमाँ … Read more

मित्रता

मित्रता

यह मित्रताओं के टूटने का समय है। जब तिरस्कार, घृणा, दरिंदगी व गलाजतएकदम से चुक चुकेंगीतब कमरे में बिखरे अखबारों के बीचगिरे किसी लिफाफे के वजूद की तरहटूटेगी हमारी मित्रता! जब संबंधों की बहुत गरमी के बीचचुपचाप प्रवेश करेगी कोई ठंडकतब शिशिर में पीले होते पत्तों की तरहआखिरी क्षण के अटके आँसुओं मेंटूटेगी हमारी मित्रता … Read more

रेत की माँ

रेत की माँ 1

नदी के बीच में पहुँचकरएक द्वीप पर खड़ा होकरकभी मैं नदी को देख रहा थातो कभी रेत को नदी चुपचाप सोई हुई थीऔर रेत हूँमच हूँमच कर दूध पी रही थी रेत लगातार मोटी होती जा रही थीजबकि नदी दुबलीऔर दुबली होती नदीयह देखकर प्रसन्न थी कि लोग उसे माँ कहते हैं।   (‘रेत में आकृतियाँ’ … Read more

रेत में आकृतियाँ

रेत में आकृतियाँ

गंगापारछाटपारआकाश में सरकता सूरजजिस समय गंगा के ठीक वक्ष पर चमक रहा थाबालू को बाँधने की हरकत मेंकलाकारों का अनंत आकाश धरती पर उतरने की कोशिश कर रहा थाधरती जिस पर आकाश से गिराए गए बमों की गूँज थीजहाँ अभी-अभी सद्दाम को फाँसी दी गई थीजहाँ निठारी कांड से निकलने वाले मासूम खून के धब्बेअभी … Read more