हाथ

हाथ1

जब किसी तरह खड़ी हुईं वे बोलनेगीली थी हथेलियाँ और उलझी उँगलियाँघुसी जा रही थीं पैरों की चप्पलें आपस मेंसीधी खड़ी नहीं हो पा रही थीं या आदत नहीं रहीं होइसे प्रचारित किया गया उनकी विनम्रता की तरह मान्यता थी कि वे लताएँ हैंउन्होंने जीवन धारण किया दूसरी जगहपड़ी रही थोड़े दिनों प्रेम मेंबना रहा … Read more

हमारा शहर

हमारा शहर

जब दिल्ली के हालात बिगड़ने शुरू हुए तोशिल्पियों, कलाकारों और शायरों ने इस शहर का रुख कियाऔर शहर ने उन्हें पनाह दी शोहरत भी जब देहातों के हालात बिगड़ने लगेतब भी इस शहर ने लोगों को आसरा दियायाचकों को चुनने की स्वतंत्रता नहीं थी यह उन गिने चुने शहरों में थाजहाँ सन् 47 में बचा … Read more

साजिदा की प्रेमकथा

साजिदा की प्रेमकथा

उसके सपनों में अपना पुराना सा कुर्ता टाँगकरवह चुपचाप चला गयासड़क पर उल्टी पड़ी रहीं चप्पलें उसके होने से आती थीं चिट्ठियाँजिनमें दर्ज प्याज की परतें आटे का थैला स्वाद भर नमकऔर कलछुल का संगीत वह तो था ही जनम का मसखराकभी न लौटने के बारे में पहले कभीकहने लगता तो लगता फिर मजाक कर … Read more

लिखता हूँ

वही नहीं लिख पाया

मैं एक कविता लिखता हूँ सोचता हूँ कि इसे कोई पढ़ेगा ?शहर में रहने वाला एक समझदार पाठक, बहुत पढ़ा लिखादेहात में रहने वाला एक मामूली पाठक जिसे कविता की बहुत गहरी समझ नहीं हैंजो कविता का आस्वाद लेने के लिए प्रशिक्षित भी नहीं है। फिर मुझे याद आ जाती है कविता की वाचिक परंपरालोगों … Read more

मूँगफलियाँ

मूँगफलियाँ

आदमकद पुतले, डिजाइनर पोशाकें, खुलापनचमचमाते जूते और चश्मे रंगीनअलग तरह के स्वाद पिज्जा बर्गर आइस्क्रीमनिरंतर बज रही धुन पर खाते-पीते मस्त लोगपुराना काफी हाउस, गांधी की मुहरवाला खादी भंडारसंकटमोचन मंदिर पटरी पर पत्रिकाएँ और अखबार सद्यजात जिनकी अभी नभिनाल भी नहीं काटी गई थीबेच रहे थे खास रंगोंवाले कपड़ेभाषा को दी जा रही थीं नई … Read more

मुक्ति

अधूरी कविता

वे बुझी बुझी आँखों से देख रहे हैं नई नकोर किताबेंजो खास उन्हीं के लिए बनवाई गई हैं किताब के पन्नों पर रंग बिरंगी तितलियाँ हैंपतंगें खेल खिलौने फल और सब्जियाँताजमहल लालकिला चारमीनार और बनारस के घाटकिस्सों और कहानियों वाला साफ सुथरा जीवनजगर मगर सपने खुश रहने के नुस्खेसब कुछ सही और संतुलित अनुपात में … Read more

बैलेंस शीट

बैलेंस शीट

अप्रैल से मार्च वाले स्वदेशीया जनवरी से दिसंबर वाले विदेशीकिस वित्तीय वर्ष में दर्शाएँगे हमारा मुनाफातिमाही या रबी-खरीफ-जायद के हिसाब से चौमासाबनाएँगे हमारी भी बैलेंस शीट ? पिछली बाढ़ के बाद बीज भी नहीं बचाकर्ज पर खाद-पानीसमर्थन-मूल्य की घोषणा के बावजूदतय नहीं है कटेगा तो किस भाव बिकेगाखड़ा गन्ना खेत में जलाना पड़ाफालतू पैदा हो … Read more

बगुले

बगुले1

रोपनी के लिए आई मजूरिनों से उनका पुराना नाता हैअक्सर उनकी हरकत का पता तब चलता हैजब उड़ जाते हैं करके शिकार पानी में ताल में मछली के इंतजार में ध्यानमग्नहल के पीछे-पीछे भैंसों के आसपासघास में दुबके कीड़े-मकोड़ों पर नजर, नके लिए जैसे हर तरफ आहारऔर कोई नहीं करता बगुलों का शिकार इस इलाके … Read more

फोन पर

फोन पर

क्या तुम ठीक हो? हाँ अब सब ठीक हैतुम कब आ रहे हो? पता नहीं, कोशिश करूँगाकब तक? पता नहींहैलो? हैलो? आवाज आ रही है? हैलो? सुनाई दे रहा है? जैसे अचानक कुछ कहने के लिए नहीं रहावे एक गहरे खालीपन में घिर गए बीच की उस दूरी के दरम्यानहैलो? हैलो? हैलो? हैलो?उसने चाहा कम … Read more

फोटो एलबम

फोटो एलबम

उसमें थोड़ा सा परिवारिक इतिहास थाकुछ निजी और सार्वजनिक अनुभव थेस्त्रियाँ भी थीं, ज्यादातर शादी के कपड़ों में,मूँछ उमेठे पतियों, बच्चों के साथ कई तस्वीरें थीं जिनके साथ वाकये जुड़े होंगे,माँ ने कभी जिक्र नहीं किया, क्या पता सुनाती और कोई सवाल उठा देता तो क्या जवाब देतीएक फोटो है, कांग्रेस-अधिवेशन मेंस्वयंसेवक के रूप में … Read more