एक पीली शाम
एक पीली शाम

एक पीली शाम
पतझर का जरा अटका हुआ पत्ता
शान्त
मेरी भावनाओं में तुम्‍हारा मुखकमल
कृश म्‍लान हारा-सा
     (कि मैं हूँ वह मौन दर्पण में तुम्‍हारे कहीं?)

वासना डूबी
शिथिल पल में
स्‍नेह काजल में
लिये अद्भुत रूप-कोमलता

अब गिरा अब गिरा वह अटका हुआ आँसू
सान्‍ध्‍य तारक-सा अतल में।

See also  बस्ते | कुमार अनुपम

[1953]

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