स्मृति-लोक

उन्होंने सारे दरवाजे और खिड़कियाँ बंद कर लीं। परदे खींच लिए। परदे का कोना उठाकर बाहर झाँककर देखा, आसपास कोई दिखाई नहीं दिया – यानी परदों के पार कोई झाँककर नहीं देख सकता था इस बात का विश्वास उन्हें हो गया। इस मैदान खाली था। न बच्चे क्रिकेट खेल रहे थे, न गाय-भैंस… घास की … Read more

रोटियाँ

यह तीसरा दिन था जब वह रोटियाँ वापस ले जा रही थी। रोटियाँ बैग में थीं… जिन्हें वह कभी अलमारी में रख चुकी थी तो कभी टेबल पर तो कभी हाथ में, लेकिन हर बार कोई आ जाता और वह पैकेट छुपा लेती। उसे अफसोस हो रहा था कि रोटियाँ सामने रखी हैं और वह … Read more

तिकड़ी

कालचक्र के किसी कालखंड में पृथ्वी पर स्थित किसी देश के, किसी प्रदेश के, किसी जिले के, किसी तहसील के, किसी गाँव के, किसी मुहल्ले में दो परिवार रहते थे। एक परिवार था पटेल साहब का और दूसरा परिवार था पंचायत अध्यक्ष पंडित रमाकांत तिवारी का। दोनों परिवारों का डेढ़ सौ परिवार वाले गाँव में … Read more

एक और प्रतिज्ञा

राजा शांतनु के समक्ष गंगा द्वारा की गई प्रतिज्ञा – ‘मेरे किसी कार्य को आप नहीं टालेंगे और न ही कोई कार्य करने से मुझे रोकेंगे, सो मेरी प्रतिज्ञा विरुद्ध कोई बात नहीं करेंगे तो मैं आपकी भार्या बनकर रहने को उद्यत हूँ और ज्यों ही आपने मेरी प्रतिज्ञा को भंग किया, मैं आपको छोड़कर … Read more