हिंदी हमारी

हिंदी हमारी

हिंदी न आगे रखोन पीछेसाथ-साथ रखोघर-बाहर-दफ्तर मेंमन के घर में, वाणी मेंपरदेस मेंहर भाषा सीखपर अपनी भाषा मत भूलमातृभाषा नाशतो धर्म-जाति नाश

सूरज

सूरज1

सूरज आसमान से चलता किरणें बिखरती जमीं परवह अपना क्षण पल घड़ी, चक्कर काट रहा कहीं पर चक्कर काट रहा कहीं पर, सुबह से शाम तक चलता हैजंगल पहाड़ समुद्र के ऊपर, अपने समय पर गुजरता है कहे सुरजन सत्य धारण कर, तोड़ दो तम-रजव्यर्थ समय खोना मत मौत की चेतावनी देता सूरज

संत तुलसीदास की कथा सुनो

संत तुलसीदास की कथा सुनो

संत तुलसीदास की कथा सुनोजो भारत के महाकवि कहलाते हैं भारत एक देश है जहाँ अद्भुत लीलाएँ होती रहती हैंऐसे ही, एक विचित्र पुरुष की कहानी हमें भी मिलती हैबांदा जिला, राजापुर गाँव में, जन्म एक बालक गुमनाममाता थी हुलसी देवी, और पिता ब्राह्मण आत्मारामजिनकी महिमा भारत के इतिहासों मेंगौरव गान सुनाते हैं संत तुलसीदास … Read more

सच्चा भक्त

सच्चा भक्त

भगवान के पास चिटृठी लिखो, चाहे करो टेलीग्रामवेदमंत्र उच्चारण करो, चाहे लो तुम हजारों नाम चाहे लो तुम हजारों नाम, सब तीर्थीं में डुबकी लगाओमूड़ मुँड़ाए संन्‍यासी बनो, माथे पर चंदन तिलक लगाओ कहे सुरजन राम नाम, जो हृदय से ले जानसच्चा भक्त वही जगत में, घर बैठे दर्शन दे भगवान

रोशनी के लिए

रोशनी के लिए

अगर किसी वृक्ष मेंना कंद – ना मूलना फल – ना फूलऔर न छाया फिर भी वेजीते हैं अपनी मृत्युअपना जन्मईंधन बनकरकिसी की रोटी के लिएसबकी रोशनी के लिए

रामायण

रामायण

रामायण क्या है, उसका उत्तर देना कठिन हैरामायण में क्या नहीं है, ये बताना और कठिन काम हैजहाँ रामायण है, वहाँ तो स्वयं प्रभु रामजी हैंऔर जहाँ राम हैं, वहाँ तो सारा विश्व विराजमान हैये बताती है रामायण, ये बताती है रामायण 2. रामायण न पुराण है, न शास्त्र है और न ही वेद हैवो … Read more

रंग महल में दीप जले

रंग महल में दीप जले

रंग महल में दीप जलेझोंपड़ियों में अँधेरा है कोई दीप जलाए कोई सजाएयह तो दुनिया का काम हैमाल खजाना जिस के घर भरावह क्यों पूछे घी के क्या दाम हैवे खाकर तोंद फुलाए औरलाखों मुसीबत हमें घेरा है रंग महल में दीप जलेझोंपड़ियों में अँधेरा है सच्चा दीया तो अंदर जलताजो पवित्र हृदय से जलाएवही … Read more

मेरे घर में है घोर अँधेरा

मेरे घर में है घोर अँधेरा

जलता है मेरा टूटा हुआ दिलवही बन के आँसू निकल रही हैमेरे घर में है घोर अँधेराचिराग औरों की महफिल में जल रहे हैं जिन चरणों में शीश झुकायावही चरण कुचल दिया मुझेमिला केवल धोखा ही धोखाहम उसी के इशारों पर चल रहे हैं कब जवानी आई कब बुढ़ापाहमेशा आँसू पीकर जीते रहेजब हँसने की … Read more

मन का कोलाहल

मन का कोलाहल

तराजू केएक और सामानदूसरी ओर तौल वजन बराबरपर दाम समान नहींबराबर होते हुएबराबरी करने लायक नहींबराबर होनाऔर बराबर दिखनाबराबरी का एक छल हैछल प्रायःमन के कोलाहल का कारण है