पागलखाना
पागलखाना

बस की खिड़की से
सिर टेककर
बाहर के दृश्यों को, आदमियों को
जगहों को
देख रहा था मैं…
अचानक एक ऐसा मनुष्य
मुझे दिखाई दिया…
सड़क किनारे बिजली के खंभे
के सहारे खड़ा था वह…
जो सच में बिल्कुल नंगा था…
बाल लंबा था, कुल मिलाकर
बदसूरत था…!!
एक दो मिनट तक बस उधर रुकी
तो मैंने गौर से उसे देखा।
यह घटना इधर इस पुराने फ्रेंच
शासित जगह पर हुई थी…
बस आगे बढ़ी…तो मेरा मन दूर
केरल तक गया
उधर भी है दो ऐसी जगह
सिर्फ दो कहना ठीक नहीं…
पूरा केरल एक पागलखाना है!
लेकिन फिलहाल दो ऐसी जगहों पर बात करते हैं
जहाँ पर मेरा ध्यान चला गया था
वे जगह उन पागलखानों के ही नाम
से जाने जाते हैं
मजाक ही सही सच कहते हैं डैव
तुम्हें कुतिरवट्टम भेजना होगा…
और नहीं तो
तुम्हें ऊलंपारा भेजना होगा…
कभी नहीं सोचा था इसके पहले
उन पागलों के बारे में, जो इन कथित
पागलखानों में जी रहा होगा
अब वक्त आ गया है… आज…
मजबूर हूँ मैं
उन पागलखानों में जो जिंदगी
वे जी रहे होंगे
वह किसी की भी हो सकती है
मेरी, आपकी…हम सबकी!!!

See also  अकेले में तुम्हारी उपस्थिति | निशांत

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *