स्वप्नमयी संगिनी | पर्सी बिश शेली

स्वप्नमयी संगिनी | पर्सी बिश शेली

स्वप्नमयी संगिनी | पर्सी बिश शेली स्वप्नमयी संगिनी | पर्सी बिश शेली स्वप्नरत, रास्ते से गुजरते देखा मैंनेसर्दियाँ हुई मौन… अचानक आ गया वसंतभटक गया मन, ऐसी गमकती थी गंधसमाए थे जिसमें जलधाराओं के रंग बहती जल धाराएँ पसरे हुए दूबचौरे परघनी झाड़ियों ने जिसे रखा था ढककरकभी नहीं सँजोया था साहस जिसकीहरित-मयूरपंखी उतावली बाँहों … Read more

विरही परिंदा | पर्सी बिश शेली

विरही परिंदा | पर्सी बिश शेली

विरही परिंदा | पर्सी बिश शेली विरही परिंदा | पर्सी बिश शेली बिछड़ी माशूका के गम में मायूस थाविरह से व्यथित एक विरही परिंदाबैठा था काँपती डाल के कोने परगुमसुम… यादों के हसीं हिंडोले परसीना चीर रही थी ऊपर हवाएँ सर्दनीचे बहता झरना भी हो गया था बर्फबेरौनक थे बेपत्ता जंगलों के नंगे ठूँठजमीन पर … Read more

कवि का स्वप्न | पर्सी बिश शेली

कवि का स्वप्न | पर्सी बिश शेली

कवि का स्वप्न | पर्सी बिश शेली कवि का स्वप्न | पर्सी बिश शेली कवि के ओठों पर निद्रामग्न प्रेमदक्षस्वप्न में डूबे अगणित यक्षश्वासों में हो रहे थे स्पष्ट प्रतिध्वनितउनके नश्वर, मानवी सुखों को अर्पितपीछा करती हैं आकृतियाँ विचारों के झंझावात मेंसाँझ तक खोया है कवि जिनके चुंबनों मेंझील पर प्रखर पावन सूर्य का प्रतिबिंबपीली … Read more

उसके लिए | पर्सी बिश शेली

उसके लिए | पर्सी बिश शेली

उसके लिए | पर्सी बिश शेली उसके लिए | पर्सी बिश शेली संगीत के सुर गूँजते हैं मीठी यादों मेंप्रेमालाप की धुन जब हो जाती है गुमगमक एहसास कराती है गंध कामुरझा जाते हैं जब महकते फूलप्रेमिल गुलाबों के मुरझाने पर पंखुड़ियाँप्रेमिका के लिए रचती हैं मखमली सेजऔर जब विचार भी कहीं हो जाते हैं … Read more