जज और मजिस्ट्रेट मे क्या अंतर होता है?

आमतौर पर कई लोग जज और मजिस्ट्रेट के सही अंतर को नहीं जानते।

जज (न्यायाधीश) और मजिस्ट्रेट (दंडाधिकारी) दोनों में अंतर होता है।

जज (judge)

जज सार्वजनिक अधिकारी होता है। जिसका कर्तव्य है कि वह कानून का संचालन करे, विशेष रूप से परीक्षण और निर्णय का प्रतिपादन करे। जज शब्द की व्युत्पत्ति

फ़्रांसिस बेकन का कहना है

सुनवाई में एक न्यायाधीश के चार हिस्से हैं: सबूतों को निर्देशित करने के लिए; से मध्यम लंबाई, पुनरावृत्ति, या भाषण की अपूर्णता; पुनरावृत्ति करना, चयन करना और उस के भौतिक बिंदुओं को टटोलना, जो कहा गया है; और नियम या वाक्य देने के लिए।


एक व्यक्ति जो किसी के अंतिम परिणाम का फैसला करता है या ऐसा कुछ जिसे प्रश्न में कहा जाता है।

ड्राइडन का कहना है –

एक आदमी जो कानून का कोई जज नहीं है, वह कविता, या वाक्पटुता या किसी पेंटिंग की खूबियों का एक अच्छा न्यायाधीश हो सकता है।

जज को सिविल यानी व्यवहार मामले मिलते हैं। इन्हें उर्दू में दीवानी मामले भी कहा जाता है। ऐसे मामले जो अधिकार, अनुतोष या क्षतिपूर्ति से जुड़े होते हैं, वो सिविल मामले कहलाते हैं। इनका जिक्र सीपीसी 1908 के सेक्शन 9 में किया गया है। सिविल जज लोअर कोर्ट निचली अदालत में बैठते हैं।

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मजिस्ट्रेट (Magistrate)

एक न्यायिक अधिकारी, जो कानून को संचालित करने और लागू करने के लिए सीमित अधिकार रखता है। मजिस्ट्रेट की अदालत में नागरिक या आपराधिक मामलों या दोनों में अधिकार क्षेत्र हो सकता है। मजिस्ट्रेट शब्द की व्युत्पत्ति

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राज्य का एक उच्च अधिकारी या जिसे प्राचीन ग्रीस या रोम में एक नगर पालिका कहा जाता था। (ऐतिहासिक, विस्तार से) मध्ययुगीन या आधुनिक संस्थानों में एक तुलनीय अधिकारी।

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मजिस्ट्रेट को क्रिमिनल केस यानी दाण्डिक मामले मिलते हैं। इन्हें उर्दू में फौजदारी मामले भी कहा जाता है।

ऐसे मामले जिनमें अपराध के लिए प्रावधान है और जिनमें दंड की मांग की जाती है। वह दाण्डिक मामले कहलाते हैं।

ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट निचली अदालत के फर्स्ट क्लास या सेकंड क्लास भी बैठते हैं।

उपर्युक्त सभी तथ्यों को समझने के लिए एक उदाहरण देखिए –

मान लीजिए आपके घर पर किसी ने कब्जा कर लिया तो आप उसके खिलाफ सिविल केस लगाएंगे। घर खाली करवाने की मांग करेंगे। और कम्पनसेशन के लिए दावा करेंगे। ये मामले देखेंगे सिविल जज। अधिकार या अनुतोष की मांग की है तो इसकी सुनवाई जो कोई भी करेगा, उसे सिविल जज कहा जाएगा।

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वहीं जब आप कब्जा करने के लिए दंड देने की मांग करेंगे तो इसे क्रिमिनल कोर्ट में ले जाएंगे और इसकी सुनवाई मजिस्ट्रेट करेगा जिसे दंडाधिकारी कहा जाएगा।

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