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स्वदेश-विज्ञान

जब तक तुम प्रत्येक व्यक्ति निज सत्त्व-तत्त्व नहिं जानोगेत्यों नहिं अति पावन स्वदेश-रति का महत्त्व पहचानोगेजब तक इस प्यारे स्वदेश को अपना निज नहिं मानोगेत्यों अपना निज जान सतत-शुश्रूषा-व्रत नहिं ठानोगेप्रेम-सहित प्रत्येक वस्तु को जब तक नहिं अपनाओगेसमता-युत सर्वत्र देश में ममता-मति न जगाओगेजब तक प्रिय स्वदेश को अपना इष्ट-देव न बनाओगेउसके धूलि-कणों में आत्मा […]